- स्थानभीमाशंकर, खेड तालुका, पुणे जिला, महाराष्ट्र
- अधिष्ठाता देवताशिव
यात्री सूचना: वर्षा ऋतु में घाट मार्ग पर घना कोहरा और फिसलन रहती है; वाहन चालन में विशेष सावधानी रखें।
शास्त्रोक्त एवं ऐतिहासिक महत्व
- पौराणिक संदर्भ: शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) के अनुसार कुंभकर्ण के पुत्र भीम नामक असुर के अत्याचार से देवताओं और भक्त राजा सुदक्षिण की रक्षा हेतु शिव ने उसका संहार किया और भक्तों की प्रार्थना पर यहाँ भीमाशंकर रूप में स्थित हुए।
- भीमा नदी का उद्गम: सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित यह स्थल भीमा नदी का उद्गम माना जाता है, जो आगे कृष्णा नदी में मिलती है।
- ऐतिहासिक संरक्षण: मंदिर का मूल भाग प्राचीन है; 18वीं शताब्दी में पेशवा काल के मंत्री नाना फडणवीस ने सभामंडप एवं शिखर का निर्माण/जीर्णोद्धार कराया।
- अन्य मान्यताएँ: स्तोत्र के "डाकिन्यां भीमशङ्करम्" पद के आधार पर असम (गुवाहाटी के समीप) तथा उत्तराखंड (काशीपुर) की परंपराएँ भी भीमाशंकर होने का दावा करती हैं, किंतु व्यापक रूप से पुणे जिले का यह मंदिर ही ज्योतिर्लिंग के रूप में मान्य है।
प्रमुख विशेषताएँ, वास्तुकला, अनुष्ठान एवं आरती
- शैली: नागर शैली का मंदिर, जिसमें हेमाडपंती (यादव कालीन) शैली के तत्व भी दिखाई देते हैं; स्तंभों एवं द्वारों पर देवी-देवताओं की उत्कीर्ण आकृतियाँ हैं।
- गर्भगृह: गर्भगृह सभामंडप से नीचे स्तर पर है; स्वयंभू लिंग के ऊपर से सदैव जल रिसता रहता है।
- ऐतिहासिक घंटा: परिसर में एक विशाल पुर्तगाली घंटा है, जिसे 1739 ई. में वसई विजय के पश्चात चिमाजी अप्पा ने यहाँ अर्पित किया था।
- पूजा: प्रातः काकड़ आरती, मध्याह्न नैवेद्य तथा सायंकालीन आरती; सोमवार एवं प्रदोष पर विशेष रुद्राभिषेक।
दर्शन का सही समय, समय-सारिणी एवं उत्सव
- उपयुक्त ऋतु: अक्टूबर से फरवरी; जून–सितंबर में अत्यधिक वर्षा होती है, यद्यपि श्रावण मास में भीड़ सर्वाधिक रहती है।
- दैनिक दर्शन: लगभग प्रातः 4:30 से रात्रि 9:30 बजे तक; मध्याह्न आरती के समय कुछ देर दर्शन रुकते हैं (समय में परिवर्तन संभव; यात्रा से पूर्व मंदिर न्यास से पुष्टि करें)।
- प्रमुख पर्व: महाशिवरात्रि (विशाल मेला), श्रावण मास के सोमवार तथा कार्तिक पूर्णिमा (त्रिपुरारी पूर्णिमा)।
कैसे पहुँचें
- हवाई मार्ग: पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा — लगभग 120 किमी।
- रेल मार्ग: पुणे जंक्शन — लगभग 110 किमी; मुंबई की ओर से कर्जत स्टेशन से भी पहुँच संभव है।
- सड़क मार्ग: पुणे–नाशिक राजमार्ग पर राजगुरुनगर/मंचर से घाट मार्ग द्वारा; पुणे (शिवाजीनगर) से महाराष्ट्र राज्य परिवहन की सीधी बसें।
आसपास के आध्यात्मिक एवं दर्शनीय स्थान
- गुप्त भीमाशंकर: वन पथ में भीमा नदी के उद्गम के समीप — लगभग 1.5 किमी।
- कमलजा देवी मंदिर: लगभग 0.5 किमी।
- भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य: महाराष्ट्र के राज्य पशु शेकरू (भारतीय विशाल गिलहरी) का आवास — मंदिर के चारों ओर।
- नागफणी शिखर: सह्याद्रि का दृश्य-बिंदु — लगभग 2 किमी।
- शिवनेरी दुर्ग, जुन्नर: छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान — लगभग 90 किमी।
- लेण्याद्रि (अष्टविनायक): लगभग 95 किमी।
चित्र
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महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में सह्याद्रि की वादियों के बीच स्थित श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग—द्वादश ज्योतिर्लिंगों में छठा स्थान। नागर शैली की बेजोड़ वास्तुकला और घने अभयारण्य से घिरा यह पावन तीर्थ आत्मि
स्रोत 1
- Major Temples, Tirthas & Dhams of India (Avyani project reference, EN + HI editions, Sep 2026)
जहाँ कोई परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों या संप्रदायों में अलग ढंग से कही जाती है, वहाँ सभी कथन साथ-साथ दिए गए हैं।
दर्शन समय, कपाट तिथियाँ, पंजीकरण नियम एवं दूरियाँ अनुमानित हैं और समय-समय पर बदलती हैं; यात्रा से पूर्व संबंधित मंदिर ट्रस्ट/प्रशासन की आधिकारिक सूचना से पुष्टि करें।