- स्थानदारुकावन क्षेत्र, द्वारका–बेट द्वारका मार्ग, देवभूमि द्वारका जिला, गुजरात
- अधिष्ठाता देवताशिव
यात्री सूचना: नागेश्वर, गोपी तालाब एवं बेट द्वारका के दर्शन प्रायः एक साथ किए जाते हैं; बेट द्वारका के मंदिरों के दर्शन समय अलग होते हैं, पहले पुष्टि कर लें।
शास्त्रोक्त एवं ऐतिहासिक महत्व
- पौराणिक संदर्भ: शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता) के अनुसार दारुका नामक राक्षसी एवं दारुक असुर ने शिवभक्त वैश्य सुप्रिय को बंदी बनाया; सुप्रिय की आराधना पर शिव प्रकट हुए, असुरों का संहार किया और "नागेश" रूप में यहाँ स्थित हुए। स्तोत्र का "नागेशं दारुकावने" पद इसी कथा से संबंधित है।
- नाग-रक्षा का भाव: परंपरा में नागेश्वर को विष एवं सर्प-भय से रक्षा करने वाले शिव के रूप में पूजा जाता है।
- वर्तमान मंदिर: मंदिर का आधुनिक पुनर्निर्माण 1990 के दशक में हुआ (1996 में पूर्ण); परिसर में ध्यानमुद्रा में शिव की लगभग 25 मीटर (82 फीट) ऊँची प्रतिमा स्थापित है।
- अन्य मान्यताएँ: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले का औंढा नागनाथ तथा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का जागेश्वर भी नागेश ज्योतिर्लिंग होने की परंपरा रखते हैं; द्वारका क्षेत्र का यह मंदिर व्यापक रूप से मान्य है।
प्रमुख विशेषताएँ, वास्तुकला, अनुष्ठान एवं आरती
- शैली: आधुनिक पाषाण निर्मित मंदिर, जिसमें सभामंडप और भूमि-स्तर से नीचे स्थित गर्भगृह है।
- लिंग स्वरूप: स्वयंभू लिंग "द्वारका शिला" (छोटे चक्रांकित पत्थर) से बना माना जाता है और उस पर त्रिमुखी रुद्राक्ष जैसी आकृति बताई जाती है; लिंग पर चाँदी का आवरण रहता है।
- पूजा: भक्त गर्भगृह में निर्धारित समय पर स्वयं अभिषेक कर सकते हैं (इसके लिए धोती/पारंपरिक वस्त्र आवश्यक); रुद्राभिषेक एवं सर्प-दोष शांति हेतु पूजा प्रचलित है।
- आरती: प्रातः मंगला आरती एवं सायंकालीन श्रृंगार आरती।
दर्शन का सही समय, समय-सारिणी एवं उत्सव
- उपयुक्त ऋतु: अक्टूबर से मार्च; ग्रीष्म में सौराष्ट्र तट पर तापमान अधिक रहता है।
- दैनिक दर्शन: लगभग प्रातः 6:00 से दोपहर 12:30 तथा सायं 5:00 से रात्रि 9:00 बजे तक (समय में परिवर्तन संभव; यात्रा से पूर्व मंदिर न्यास से पुष्टि करें)।
- प्रमुख पर्व: महाशिवरात्रि, श्रावण मास के सोमवार तथा नागपंचमी; द्वारका में जन्माष्टमी के समय भी यात्रियों की संख्या अधिक रहती है।
कैसे पहुँचें
- हवाई मार्ग: जामनगर हवाई अड्डा — लगभग 140 किमी; पोरबंदर हवाई अड्डा — लगभग 115 किमी।
- रेल मार्ग: द्वारका स्टेशन — लगभग 17 किमी; ओखा स्टेशन — लगभग 15 किमी।
- सड़क मार्ग: द्वारका से ऑटो/टैक्सी द्वारा; जामनगर एवं राजकोट (लगभग 230 किमी) से राज्य परिवहन बसें द्वारका तक।
आसपास के आध्यात्मिक एवं दर्शनीय स्थान
- द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर), द्वारका: चार धाम में एक — लगभग 17 किमी।
- रुक्मिणी देवी मंदिर: लगभग 15 किमी।
- गोपी तालाब: लगभग 5 किमी।
- बेट द्वारका: सुदर्शन सेतु (2024) द्वारा ओखा से जुड़ा — लगभग 15–20 किमी।
- शिवराजपुर तट: लगभग 10 किमी।
चित्र
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गुजरात के द्वारका-बेट द्वारका मार्ग पर स्थित श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग—द्वादश ज्योतिर्लिंगों में दशम स्थान। भगवान शिव की 82 फीट ऊंची भव्य ध्यानस्थ प्रतिमा और लाल शिखर के मंदिर से सुशोभित यह पावन तीर्
स्रोत 1
- Major Temples, Tirthas & Dhams of India (Avyani project reference, EN + HI editions, Sep 2026)
जहाँ कोई परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों या संप्रदायों में अलग ढंग से कही जाती है, वहाँ सभी कथन साथ-साथ दिए गए हैं।
दर्शन समय, कपाट तिथियाँ, पंजीकरण नियम एवं दूरियाँ अनुमानित हैं और समय-समय पर बदलती हैं; यात्रा से पूर्व संबंधित मंदिर ट्रस्ट/प्रशासन की आधिकारिक सूचना से पुष्टि करें।