सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हर परिवर्तन के साथ उसका समाप्ति समय दिया है।
वार
मंगलवार
सूर्योदय से अगले सूर्योदय
05:31 – 11/10/2034, 05:31
तिथि
त्रयोदशी · कृष्ण तक
इसके बादचतुर्दशी · कृष्ण तक
नक्षत्र
पूर्व फाल्गुनी तक
इसके बादउत्तर फाल्गुनी तक
योग
शुक्ल तक
इसके बादब्रह्म तक
करण
वणिज तक
इसके बादविष्टि तक
इसके बादशकुनि तक
चन्द्र स्थिति एवं हिन्दू मास
चन्द्र राशि
सिंह तक
इसके बादकन्या तक
पक्ष
कृष्ण तक
अमांत मास
भाद्रपदसमाप्ति: 12/10/2034, 13:02
पूर्णिमांत मास
आश्विनसमाप्ति: 27/10/2034, 18:12
दोनों मास परंपराएँ दी गई हैं। अधिक मास अतिरिक्त चंद्र मास है; क्षय चक्र में लुप्त मास का नाम दिया है। अपनी क्षेत्रीय या कुल-परंपरा का पालन करें।
चंद्र एवं सूर्य · निरयन स्थिति
चुने शहर के सूर्योदय की स्थिति: 05:31 · Asia/Kolkata
राशि, नक्षत्र, चरण और स्पष्ट भोगांश
ग्रह
राशि
नक्षत्र / चरण
राशि में · कुल 0–360°
चंद्र
सिंह
पूर्व फाल्गुनी / 4
राशि में: 26° 13′ 08″ | कुल भोगांश: 146° 13′ 08″
सूर्य
कन्या
हस्त / 4
राशि में: 22° 25′ 24″ | कुल भोगांश: 172° 25′ 24″
चंद्र राशि / नक्षत्र / चरण परिवर्तन
राशि · नक्षत्र / चरण
इस दिन में आरंभ – समाप्ति
सिंह · पूर्व फाल्गुनी / 4
05:31 – 06:22
सिंह · उत्तर फाल्गुनी / 1
06:22 – 12:47
कन्या · उत्तर फाल्गुनी / 2
12:47 – 19:13
कन्या · उत्तर फाल्गुनी / 3
19:13 – 11/10/2034, 01:40
कन्या · उत्तर फाल्गुनी / 4
11/10/2034, 01:40 – 05:31
सूर्य राशि / नक्षत्र / चरण परिवर्तन
राशि · नक्षत्र / चरण
इस दिन में आरंभ – समाप्ति
कन्या · हस्त / 4
05:31 – 11/10/2034, 03:36
कन्या · चित्रा / 1
11/10/2034, 03:36 – 05:31
चंद्रोदय
11/10/2034, 04:32
चंद्रास्त
16:04
चंद्रोदय/चंद्रास्त में अव्यनी की मौजूदा व्रत-परंपरा है: चंद्र-बिंब का केंद्र, चंद्र लंबन, समतल क्षितिज और बिना वायुमंडलीय अपवर्तन। समय इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय का है; मौसम, भूभाग या चंद्र-दर्शन की गारंटी नहीं है।
कालगणना एवं सौर मास
विक्रम संवत · चैत्रादि
2091
शालिवाहन शक · चांद्र
1956
संवत्सर · दक्षिणी 60-वर्षीय चक्र
आनंद
वर्षारंभ
21/03/2034, 05:39
यह नामित चैत्र शुक्ल वर्ष-परंपरा है। गुजराती कार्तिकादि, नेपाली सौर वर्ष, उत्तरी बार्हस्पत्य संवत्सर और राष्ट्रीय नागरिक शक कैलेंडर की सीमाएँ अलग हैं; शहर से इनका अनुमान नहीं लगाया जाता।
पारंपरिक चांद्र ऋतुओं में चैत्र–वैशाख वसंत से माघ–फाल्गुन शिशिर तक दो-दो मास हैं। सौर ऋतु नीचे दी राशि-जोड़ी से है। ये कालगणना की परंपराएँ हैं, स्थानीय मौसम का पूर्वानुमान नहीं।
निरयन संक्रांति आधारित सौर मास
सौर राशि / मास
संक्रांति → अगली संक्रांति
प्रविष्टे/गते
अयन / ऋतु
कन्या
17/09/2034, 09:07 → 17/10/2034, 21:07
24 05:31 – 11/10/2034, 00:00
दक्षिणायन / शरद
कन्या
17/09/2034, 09:07 → 17/10/2034, 21:07
25 11/10/2034, 00:00 – 05:31
दक्षिणायन / शरद
गते में संक्रांति की स्थानीय तारीख 1 है; गिनती स्थानीय मध्यरात्रि पर बढ़ती है। अयन मकर/कर्क निरयन संक्रांति से है, खगोलीय अयनांत से नहीं। ऋतु नामित सौर-राशि परंपरा के अनुसार है।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं दिन-रात की अवधि
सूर्योदय
सूर्यास्त
अगला सूर्योदय
दिनमान · दिन की अवधि
11 घंटे 45 मिनट
सूर्योदय से सूर्यास्त
रात्रिमान · रात की अवधि
12 घंटे 16 मिनट
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय
आज के प्रमुख समय
नए कार्य की शुरुआत के लिए समय देखें। नित्य पूजा में अपनी कुल-परंपरा का पालन करें।
पूजा / उपयोगी समय
अभिजित मुहूर्त
10:59 – 11:46
सामान्यतः शुभ
ब्रह्म मुहूर्त
–
आज के सूर्योदय से पहले · प्रार्थना और स्वाध्याय
प्रदोष काल
–
संध्या आराधना · व्रत-पूजा का समय इससे छोटा हो सकता है
निशीथ काल
–
रात्रि का मध्य भाग · संबंधित अनुष्ठान का विधान देखें
सावधानी के समय
राहु काल
14:19 – 15:47
नए कार्य की शुरुआत टालें
यमगंड
08:27 – 09:55
नए कार्य की शुरुआत टालें
गुलिक काल
11:23 – 12:51
नए कार्य की शुरुआत टालें
दुर्मुहूर्त
–
–
शुभ कार्यों की शुरुआत में परंपरानुसार वर्जित; नित्य पूजा अपनी परंपरा के अनुसार करें।
भद्रा · विष्टि करण
–
सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बीच आने वाली विष्टि का पूरा समय। वर्जन कार्य के अनुसार हैं; नित्य प्रार्थना पर रोक नहीं।
शुभ एवं त्याज्य समय
नीचे इस पंचांग-दिन में आने वाला समय-खंड है। समय के साथ दूसरी तारीख आने पर वह अगले/पिछले नागरिक दिन का समय है।
काल / योग
आरंभ – समाप्ति
स्थिति
अमृत काल
11/10/2034, 00:25 – 02:08
उत्तर फाल्गुनी
विजय मुहूर्त
13:20 – 14:07
सूर्य आधारित समय
गोधूलि मुहूर्त
17:03 – 17:27
सूर्य आधारित समय
त्रिपुष्कर योग
इस पंचांग-दिन में नहीं
द्विपुष्कर योग
इस पंचांग-दिन में नहीं
सर्वार्थ सिद्धि योग
इस पंचांग-दिन में नहीं
अमृत सिद्धि योग
इस पंचांग-दिन में नहीं
रवि योग
इस पंचांग-दिन में नहीं
वर्ज्यम
14:06 – 15:49
उत्तर फाल्गुनी
पंचक
इस पंचांग-दिन में नहीं
आवश्यक शर्तें और कार्य-विशेष अपवाद
पुष्कर के लिए रविवार, मंगलवार या शनिवार; द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी; और निर्धारित नक्षत्र—तीनों का एक साथ होना आवश्यक है। त्रिपुष्कर: कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद। द्विपुष्कर: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा।
सर्वार्थ और अमृत सिद्धि में पूर्ण वार–नक्षत्र सारणियाँ लागू हैं। मंगलवार–अश्विनी, गुरुवार–पुष्य और शनिवार–रोहिणी में विवाह, यात्रा और नए गृह-प्रवेश के स्रोतगत निषेध बने रहते हैं। ये योग व्यक्तिगत कार्य-विशेष मुहूर्त का अंतिम निर्णय नहीं हैं।
अमृत काल और वर्ज्यम की अलग-अलग सारणी और अवधि वास्तविक नक्षत्र-काल के अनुपात से हैं; मूल में वर्ज्यम के दो खंड हैं। विजय दिनमान का 15 में 11वाँ भाग है। यहाँ गोधूलि सूर्यास्त के 12 मिनट पहले से 12 मिनट बाद वाली नामित परंपरा है; अन्य परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं।
पंचक चंद्र भोगांश [300°, 360°) है: धनिष्ठा चरण 3–4 से रेवती के अंत तक। प्रकार वास्तविक आरंभ के वार से है; वार स्थानीय सूर्योदय पर बदलता है: रविवार रोग, सोमवार राज, मंगलवार अग्नि, शुक्रवार चोर, शनिवार मृत्यु; इस परंपरा में बुधवार/गुरुवार का नामित प्रकार नहीं है।
रवि योग: सूर्य नक्षत्र से चंद्र नक्षत्र की समावेशी गणना 4, 6, 9, 10, 13 या 20 (Indastro परंपरा)। दोनों ग्रहों के नक्षत्र-परिवर्तन जाँचे जाते हैं। स्रोत में रविवार का कार्य-संबंधी निषेध बना रहता है; इससे अन्य निषेध मिटने का आश्वासन नहीं है।
दिशाशूल एवं पारंपरिक परिहार
उत्तर · 05:31 – 11/10/2034, 05:31 · यात्रा से पूर्व पारंपरिक आहार-परिहार: गुड़.
UOU MAJY-103 में यह पारंपरिक विधि वर्णित है। यह यात्रा-सुरक्षा की गारंटी नहीं है; अपने आहार संबंधी प्रतिबंधों का पालन करें।
गंडमूल · दैनिक नक्षत्र / चरण
इस पंचांग-दिन में नहीं।
विवरण देखें
छह नक्षत्र हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। प्रत्येक में 1–4 चरण हैं, प्रत्येक चरण 3°20′ का है। तालिका केवल आज के चंद्र गोचर को दिखाती है।
यह किसी व्यक्ति या नवजात के दोष का निर्णय नहीं है। जन्मकुंडली का गंडमूल विचार सही जन्म-समय, स्थान, कुंडली और निर्धारित परंपरा से होता है; दैनिक स्थिति मात्र से व्यक्तिगत दोष सिद्ध नहीं होता।
चौघड़िया और होरा · पारंपरिक सारणी
चौघड़िया उत्तर भारतीय क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार है। होरा में पारंपरिक ग्रह-घंटे दिए हैं। केवल इन सारणियों से पूर्ण या व्यक्तिगत मुहूर्त तय नहीं होता; अतिरिक्त क्षेत्रीय वर्जन यहाँ नहीं जाँचे गए हैं।
चौघड़िया · क्षेत्रीय परंपरा
दिन
समय
नाम
–
रोग
–
उद्वेग
–
चर
–
लाभ
–
अमृत
–
काल
–
शुभ
–
रोग
रात
समय
नाम
–
काल
–
लाभ
–
उद्वेग
–
शुभ
–
अमृत
–
चर
–
रोग
–
काल
होरा · पारंपरिक ग्रह-घंटे
दिन
समय
ग्रह
–
मंगल
–
सूर्य
–
शुक्र
–
बुध
–
चन्द्र
–
शनि
–
गुरु
–
मंगल
–
सूर्य
–
शुक्र
–
बुध
–
चन्द्र
रात
समय
ग्रह
–
शनि
–
गुरु
–
मंगल
–
सूर्य
–
शुक्र
–
बुध
–
चन्द्र
–
शनि
–
गुरु
–
मंगल
–
सूर्य
–
शुक्र
दैनिक लग्न तालिका
वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर राशियाँ हैं। केवल स्थिर लग्न होने से किसी कार्य का मुहूर्त निर्धारित नहीं होता।
सूर्योदय → अगला सूर्योदय; प्रथम/अंतिम खंड इस दिन की सीमा तक हैं, इसलिए पहली राशि अंत में फिर आ सकती है।
चैत्रादि चांद्र वर्ष / दक्षिणी 60-वर्षीय चक्र; चांद्र ऋतु चैत्र-युग्म से। सौर गते में संक्रांति का नागरिक दिन 1 है; स्थानीय मध्यरात्रि पर दिन बढ़ता है।
आज की पूजा एवं व्रत—कब क्या करें
मासिक शिवरात्रि
शिव आराधना की रात्रि; महाशिवरात्रि का अमांत माघ, पूर्णिमांत फाल्गुन होता है।
तैयारी: शिव पूजा के लिए जल, बिल्वपत्र, पुष्प और दीप तैयार रखें।
समय
क्या करें
आवश्यक ध्यान
05:31 – 11/10/2034, 05:32
संकल्पानुसार व्रत रखें
पूजा के बाद लागू पारण आरंभ होने पर समापन करें।
17:15 – 20:19
रात्रि पूजा · प्रहर 1
चार-प्रहर परंपरा में शिव पूजा दोहराएँ।
20:19 – 23:23
रात्रि पूजा · प्रहर 2
चार-प्रहर परंपरा में शिव पूजा दोहराएँ।
22:59 – 23:48
निशीथ पूजा
शिव अभिषेक और बिल्व अर्पण करें; शिव प्रार्थना व जप करें।
23:23 – 11/10/2034, 02:27
रात्रि पूजा · प्रहर 3
चार-प्रहर परंपरा में शिव पूजा दोहराएँ।
11/10/2034, 02:27 – 05:31
रात्रि पूजा · प्रहर 4
चार-प्रहर परंपरा में शिव पूजा दोहराएँ।
11/10/2034 · 05:32 – 11:23
पारण · पूजा के बाद समापन
सामान्य आचरण; कुल-परंपरा में भिन्नता संभव
पर्व की तिथि:10:06 – 11/10/2034, 11:23
पारण परंपरा: अगले सूर्योदय से शेष चतुर्दशी के अंत तक; तिथि पहले समाप्त हो तो केवल आरंभ। कुछ परंपराएँ तिथि-समाप्ति की प्रतीक्षा करती हैं।
सामान्य आचरण; कुल-परंपरा में भिन्नता संभव · निशीथ में एक बार अथवा चारों प्रहरों में पूजा करें। पारण परंपरा ऊपर दी गई है।
पूर्व फाल्गुनी तक 06:22; उत्तर फाल्गुनी तक 11/10/2034, 08:09
योग
शुक्ल तक 07:55; ब्रह्म तक 11/10/2034, 07:49
करण
वणिज तक 10:06; विष्टि तक 22:42; शकुनि तक 11/10/2034, 11:23
निरयन स्थिति · संदर्भ समय: सूर्योदय 05:31
सूर्य
कन्या · हस्त / 4
राशि में: 22° 25′ 24″ | कुल भोगांश: 172° 25′ 24″
चंद्र
सिंह · पूर्व फाल्गुनी / 4
राशि में: 26° 13′ 08″ | कुल भोगांश: 146° 13′ 08″
सूर्य · परिवर्तन: कन्या · हस्त/4 05:31 – 11/10/2034, 03:36; कन्या · चित्रा/1 11/10/2034, 03:36 – 05:31
चंद्र · परिवर्तन: सिंह · पूर्व फाल्गुनी/4 05:31 – 06:22; सिंह · उत्तर फाल्गुनी/1 06:22 – 12:47; कन्या · उत्तर फाल्गुनी/2 12:47 – 19:13; कन्या · उत्तर फाल्गुनी/3 19:13 – 11/10/2034, 01:40; कन्या · उत्तर फाल्गुनी/4 11/10/2034, 01:40 – 05:31
शुभ एवं त्याज्य समय
पूजा / शुभ
अभिजित मुहूर्त
10:59 – 11:46
ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:42
प्रदोष काल
17:15 – 19:42
निशीथ काल
22:59 – 23:48
अमृत काल
11/10/2034, 00:25 – 02:08
विजय मुहूर्त
13:20 – 14:07
गोधूलि मुहूर्त
17:03 – 17:27
त्याज्य
राहु काल
14:19 – 15:47
यमगंड
08:27 – 09:55
गुलिक
11:23 – 12:51
दुर्मुहूर्त
07:51 – 08:38; 22:10 – 22:59
भद्रा · विष्टि करण
10:06 – 22:42
वर्ज्यम
14:06 – 15:49
ब्रह्म आज के सूर्योदय से पहले है। भद्रा में संबंधित विष्टि की पूरी अवधि है। प्रदोष काल स्वतः पर्व-विशेष पूजा का समय नहीं है।
दिशाशूल एवं पंचक
दिशाशूल
उत्तर · 05:31 – 11/10/2034, 05:31
पारंपरिक परिहार
गुड़ · यात्रा से पूर्व
पंचक
नहीं
गंडमूल
नहीं
अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती; चरण 1–4। दैनिक गोचर व्यक्तिगत जन्म-दोष का निर्णय नहीं है।
चौघड़िया · दिन एवं रात
दिन
आरंभ – समाप्ति
रात
आरंभ – समाप्ति
रोग
05:31 – 06:59
काल
17:15 – 18:47
उद्वेग
06:59 – 08:27
लाभ
18:47 – 20:19
चर
08:27 – 09:55
उद्वेग
20:19 – 21:51
लाभ
09:55 – 11:23
शुभ
21:51 – 23:23
अमृत
11:23 – 12:51
अमृत
23:23 – 11/10/2034, 00:55
काल
12:51 – 14:19
चर
11/10/2034, 00:55 – 02:27
शुभ
14:19 – 15:47
रोग
11/10/2034, 02:27 – 03:59
रोग
15:47 – 17:15
काल
11/10/2034, 03:59 – 05:31
विशेष योग
नहीं
चौघड़िया उत्तर भारतीय परंपरा में। योग से अन्य निषेध समाप्त नहीं होते; रवि योग का रविवार निषेध और सिद्धि योग के कार्य-विशेष वर्जन बने रहते हैं।
होरा · दिन की 12 एवं रात की 12 अवधियाँ
दिनमान एवं रात्रिमान के अलग-अलग बारह भाग हैं; ये स्थिर 60-मिनट के घंटे नहीं हैं।
दिन
आरंभ – समाप्ति
रात
आरंभ – समाप्ति
मंगल
05:31 – 06:29
शनि
17:15 – 18:17
सूर्य
06:29 – 07:28
गुरु
18:17 – 19:18
शुक्र
07:28 – 08:27
मंगल
19:18 – 20:19
बुध
08:27 – 09:25
सूर्य
20:19 – 21:21
चन्द्र
09:25 – 10:24
शुक्र
21:21 – 22:22
शनि
10:24 – 11:23
बुध
22:22 – 23:23
गुरु
11:23 – 12:22
चन्द्र
23:23 – 11/10/2034, 00:24
मंगल
12:22 – 13:20
शनि
11/10/2034, 00:24 – 01:26
सूर्य
13:20 – 14:19
गुरु
11/10/2034, 01:26 – 02:27
शुक्र
14:19 – 15:18
मंगल
11/10/2034, 02:27 – 03:28
बुध
15:18 – 16:17
सूर्य
11/10/2034, 03:28 – 04:30
चन्द्र
16:17 – 17:15
शुक्र
11/10/2034, 04:30 – 05:31
दैनिक लग्न तालिका
लग्न
आरंभ
समाप्ति
कन्या
05:31
06:07
तुला
06:07
08:21
वृश्चिक · स्थिर
08:21
10:37
धनु
10:37
12:42
मकर
12:42
14:29
कुम्भ · स्थिर
14:29
16:03
मीन
16:03
17:34
मेष
17:34
19:14
वृषभ · स्थिर
19:14
21:13
मिथुन
21:13
23:26
कर्क
23:26
11/10/2034, 01:42
सिंह · स्थिर
11/10/2034, 01:42
11/10/2034, 03:53
कन्या
11/10/2034, 03:53
11/10/2034, 05:31
सूर्योदय से अगले सूर्योदय का वास्तविक क्रम; सीमा पर दोहराई राशि भी रखी गई है। केवल स्थिर लग्न से मुहूर्त तय नहीं होता।
समय चुने शहर के IANA ऐतिहासिक समय-क्षेत्र के अनुसार और तारीखें ग्रेगोरियन कैलेंडर में हैं। पंचांग दिवस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक है। नीचे सूर्योदय की स्थिति और उसके बाद होने वाले प्रत्येक परिवर्तन का समाप्ति समय दिया गया है।
शहर के संदर्भ बिंदु: अव्यानि के मौजूदा स्थान और GeoNames डेटा (CC BY 4.0)। GPS का उपयोग नहीं होता। GeoNames
स्थापित एपिमेरिस के लिए समर्थित तारीखें: 01/04/1550 – 31/08/2649
अनुमानित/अनंतिम समय में पृथ्वी-घूर्णन का पूर्वानुमान या मापित डेटा के बाहर डेल्टा-टी मॉडल प्रयुक्त है। सुदूर शताब्दियों की अनिश्चितता व्रत-तारीखों को भी प्रभावित कर सकती है। ऐतिहासिक समय-क्षेत्र पुनर्निर्मित हैं; भविष्य के नियम बदल सकते हैं।
यमगंड और दिन का गुलिक काल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के आठ बराबर भागों पर आधारित हैं। वार के अनुसार इनके भाग सामान्य पंचांग परंपरा से लिए गए हैं। ये दैनिक समय हैं, व्यक्तिगत मुहूर्त का निर्णय नहीं।
दैनिक चंद्रोदय/चंद्रास्त और व्रत का चंद्रोदय मौजूदा अनुष्ठानिक चंद्रकेंद्र पद्धति से, बिना अपवर्तन के हैं। संदर्भ समय और क्षितिज की पद्धति चंद्र–सूर्य अनुभाग में देखें।
ब्रह्म मुहूर्त पिछली रात के सूर्यास्त से आज के सूर्योदय तक के पंद्रह बराबर भागों में चौदहवाँ है। प्रदोष में अव्यानि का रात्रि का पहला पाँचवाँ भाग और निशीथ में मध्य का पंद्रहवाँ भाग लिया गया है। ये चुनी हुई पद्धतियाँ हैं; सभी परंपराओं की परिभाषा समान होने का दावा नहीं है।
दुर्मुहूर्त में वार के अनुसार दिन के पंद्रहवें भाग लिए गए हैं; मंगलवार को रात का सातवाँ भाग भी है। भद्रा में विष्टि करण का पूरा समय है; वास, मुख और पुच्छ का विभाजन नहीं। चौघड़िया में दिन और रात के आठ-आठ, होरा में बारह-बारह भाग हैं। यह दैनिक होरा पद्धति कुंडली की मौजूदा होरा गणना नहीं बदलती। चौघड़िया का अमृत एक पारंपरिक नाम है, नक्षत्र-आधारित अमृत काल नहीं।