दैनिक पंचांग

आज का पंचांग

गुरुवार, 29/10/2026 · कोलकाता

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इस तारीख के समय अनुमानित हैं। नीचे गणना संबंधी जानकारी देखें।

आज एक नज़र में

सूर्योदय के समय की स्थिति · सभी समय आपके शहर के अनुसार

तिथिचतुर्थी
नक्षत्ररोहिणी
पक्षकृष्ण
चन्द्र राशिवृषभ
संवत
विक्रम 2083 · शक 1948
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:39 / 17:01
चंद्रोदय
19:46
चंद्रास्त
08:48

पंचक: नहींगंडमूल: नहीं

आज की पूजा एवं व्रत—कब क्या करें

संकष्टी चतुर्थी

कृष्ण चतुर्थी पर गणेश आराधना और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना।

तैयारी: जल, दूर्वा, पुष्प, दीप और मोदक अथवा अन्य नैवेद्य रखें; पूजास्थान तैयार करें।

समयक्या करेंआवश्यक ध्यान
संकल्पानुसार; निश्चित घड़ी का समय नहींदूर्वा, पुष्प और नैवेद्य से गणेश पूजा करें। स्थानीय चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य और प्रार्थना के बाद व्रत पूर्ण करें।दर्शाए पर्व-नियम और कुलाचार का पालन करें।
05:39 – 19:47संकल्पानुसार व्रत रखेंपूजा के बाद लागू पारण आरंभ होने पर समापन करें।
19:46चंद्र-दर्शन, अर्घ्य और पूजा; फिर व्रत का समापनगणितीय चंद्रोदय दर्शन की गारंटी नहीं।
19:47 के बादपारण · पूजा के बाद समापनसामान्य आचरण; कुल-परंपरा में भिन्नता संभव

पर्व की तिथि: 01:07 – 22:10

विशेष निश्चित पूजा समय: इस परंपरा में सार्वभौम समय निर्धारित नहीं; कुलाचार और संकल्प के अनुसार करें

विवरण एवं स्रोत देखें

सामान्य आचरण; कुल-परंपरा में भिन्नता संभव · चुने शहर का चंद्रोदय देखें। चंद्रोदय और पूजा के बाद पारण होता है; इसकी सार्वभौम अंतिम घड़ी निर्धारित नहीं है।

दृक पंचांग · गणेश पूजा, चरण 1–16

करवा चौथ

पूर्णिमान्त कार्तिक कृष्ण चतुर्थी; अमान्त में आश्विन।

तैयारी: जल-भरा करवा, चौथ माता / गौरा का चित्र और कुलाचार की पूजा सामग्री तैयार रखें।

समयक्या करेंआवश्यक ध्यान
05:39 – 19:47संकल्पानुसार व्रत रखेंपूजा के बाद लागू पारण आरंभ होने पर समापन करें।
सूर्यास्त के बाद 17:01पार्वती / चौथ माता एवं शिव परिवार की पूजा कर करवा चौथ कथा सुनें।संध्या की निश्चित अंतिम सीमा उपलब्ध नहीं।
19:46चंद्र-दर्शन, अर्घ्य और पूजा; फिर व्रत का समापनगणितीय चंद्रोदय दर्शन की गारंटी नहीं।
19:47 के बादपारण · पूजा के बाद समापनसामान्य आचरण; कुल-परंपरा में भिन्नता संभव

पर्व की तिथि: 01:07 – 22:10

व्रत नियम: चंद्र-दर्शन, अर्घ्य और पूजा के बाद व्रत पूर्ण करें

विवरण एवं स्रोत देखें

सामान्य आचरण; कुल-परंपरा में भिन्नता संभव · महेश शास्त्री के नियम में दोनों दिन चंद्रोदय पर चतुर्थी हो तो पहला दिन; दोनों में न हो तो दूसरा दिन चुना जाता है। संध्या की अंतिम सीमा का सूत्र सत्यापित नहीं, इसलिए अनुमानित समय नहीं दिया है।

दृक पंचांग · करवा चौथ विधि, संकल्प / संध्या / चंद्र पूजा

विस्तृत पंचांग · पाँच अंग

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हर परिवर्तन के साथ उसका समाप्ति समय दिया है।

वार

गुरुवार

सूर्योदय से अगले सूर्योदय

05:39 – 30/10/2026, 05:39

तिथि

  1. चतुर्थी · कृष्ण तक
  2. इसके बादपंचमी · कृष्ण तक

नक्षत्र

  1. रोहिणी तक
  2. इसके बादमृगशिरा तक

योग

  1. परिघ तक
  2. इसके बादशिव तक

करण

  1. बव तक
  2. इसके बादबालव तक
  3. इसके बादकौलव तक

चन्द्र स्थिति एवं हिन्दू मास

चन्द्र राशि

  1. वृषभ तक
  2. इसके बादमिथुन तक

पक्ष

  1. कृष्ण तक

अमांत मास

आश्विनसमाप्ति: 09/11/2026, 12:32

पूर्णिमांत मास

कार्तिकसमाप्ति: 24/11/2026, 20:23

दोनों मास परंपराएँ दी गई हैं। अधिक मास अतिरिक्त चंद्र मास है; क्षय चक्र में लुप्त मास का नाम दिया है। अपनी क्षेत्रीय या कुल-परंपरा का पालन करें।

चंद्र एवं सूर्य · निरयन स्थिति

चुने शहर के सूर्योदय की स्थिति: 05:39 · Asia/Kolkata

राशि, नक्षत्र, चरण और स्पष्ट भोगांश
ग्रहराशिनक्षत्र / चरणराशि में · कुल 0–360°
चंद्रवृषभरोहिणी / 3राशि में: 19° 56′ 29″ | कुल भोगांश: 49° 56′ 29″
सूर्यतुलास्वाती / 2राशि में: 11° 21′ 07″ | कुल भोगांश: 191° 21′ 07″
चंद्र राशि / नक्षत्र / चरण परिवर्तन
राशि · नक्षत्र / चरणइस दिन में आरंभ – समाप्ति
वृषभ · रोहिणी / 305:39 – 05:45
वृषभ · रोहिणी / 405:45 – 11:11
वृषभ · मृगशिरा / 111:11 – 16:38
वृषभ · मृगशिरा / 216:38 – 22:06
मिथुन · मृगशिरा / 322:06 – 30/10/2026, 03:35
मिथुन · मृगशिरा / 430/10/2026, 03:35 – 05:39
सूर्य राशि / नक्षत्र / चरण परिवर्तन
राशि · नक्षत्र / चरणइस दिन में आरंभ – समाप्ति
तुला · स्वाती / 205:39 – 30/10/2026, 05:39
चंद्रोदय
19:46
चंद्रास्त
08:48

चंद्रोदय/चंद्रास्त में अव्यनी की मौजूदा व्रत-परंपरा है: चंद्र-बिंब का केंद्र, चंद्र लंबन, समतल क्षितिज और बिना वायुमंडलीय अपवर्तन। समय इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय का है; मौसम, भूभाग या चंद्र-दर्शन की गारंटी नहीं है।

कालगणना एवं सौर मास

विक्रम संवत · चैत्रादि
2083
शालिवाहन शक · चांद्र
1948
संवत्सर · दक्षिणी 60-वर्षीय चक्र
पराभव
वर्षारंभ
19/03/2026, 05:41

यह नामित चैत्र शुक्ल वर्ष-परंपरा है। गुजराती कार्तिकादि, नेपाली सौर वर्ष, उत्तरी बार्हस्पत्य संवत्सर और राष्ट्रीय नागरिक शक कैलेंडर की सीमाएँ अलग हैं; शहर से इनका अनुमान नहीं लगाया जाता।

वैदिक / चांद्र ऋतु · UOU की चैत्रादि युग्म परंपरा

अमान्त
शरद (इष / ऊर्ज) · आश्विन · 05:39 → 09/11/2026, 12:32
पूर्णिमान्त
शरद (इष / ऊर्ज) · कार्तिक · 05:39 → 24/11/2026, 20:23

पारंपरिक चांद्र ऋतुओं में चैत्र–वैशाख वसंत से माघ–फाल्गुन शिशिर तक दो-दो मास हैं। सौर ऋतु नीचे दी राशि-जोड़ी से है। ये कालगणना की परंपराएँ हैं, स्थानीय मौसम का पूर्वानुमान नहीं।

निरयन संक्रांति आधारित सौर मास
सौर राशि / माससंक्रांति → अगली संक्रांतिप्रविष्टे/गतेअयन / ऋतु
तुला17/10/2026, 19:51 → 16/11/2026, 19:4313
05:39 – 30/10/2026, 00:00
दक्षिणायन / शरद
तुला17/10/2026, 19:51 → 16/11/2026, 19:4314
30/10/2026, 00:00 – 05:39
दक्षिणायन / शरद

गते में संक्रांति की स्थानीय तारीख 1 है; गिनती स्थानीय मध्यरात्रि पर बढ़ती है। अयन मकर/कर्क निरयन संक्रांति से है, खगोलीय अयनांत से नहीं। ऋतु नामित सौर-राशि परंपरा के अनुसार है।

सूर्योदय, सूर्यास्त एवं दिन-रात की अवधि

सूर्योदय

सूर्यास्त

अगला सूर्योदय

दिनमान · दिन की अवधि

11 घंटे 22 मिनट

सूर्योदय से सूर्यास्त

रात्रिमान · रात की अवधि

12 घंटे 39 मिनट

सूर्यास्त से अगले सूर्योदय

आज के प्रमुख समय

नए कार्य की शुरुआत के लिए समय देखें। नित्य पूजा में अपनी कुल-परंपरा का पालन करें।

पूजा / उपयोगी समय

अभिजित मुहूर्त

10:57 – 11:42

सामान्यतः शुभ

ब्रह्म मुहूर्त

आज के सूर्योदय से पहले · प्रार्थना और स्वाध्याय

प्रदोष काल

संध्या आराधना · व्रत-पूजा का समय इससे छोटा हो सकता है

निशीथ काल

रात्रि का मध्य भाग · संबंधित अनुष्ठान का विधान देखें

सावधानी के समय

राहु काल

12:45 – 14:10

नए कार्य की शुरुआत टालें

यमगंड

05:39 – 07:04

नए कार्य की शुरुआत टालें

गुलिक काल

08:29 – 09:54

नए कार्य की शुरुआत टालें

दुर्मुहूर्त

शुभ कार्यों की शुरुआत में परंपरानुसार वर्जित; नित्य पूजा अपनी परंपरा के अनुसार करें।

भद्रा · विष्टि करण

इस पंचांग दिवस में नहीं

सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बीच आने वाली विष्टि का पूरा समय। वर्जन कार्य के अनुसार हैं; नित्य प्रार्थना पर रोक नहीं।

शुभ एवं त्याज्य समय

नीचे इस पंचांग-दिन में आने वाला समय-खंड है। समय के साथ दूसरी तारीख आने पर वह अगले/पिछले नागरिक दिन का समय है।

काल / योगआरंभ – समाप्तिस्थिति
अमृत काल08:17 – 09:44रोहिणी
अमृत काल30/10/2026, 01:03 – 02:30मृगशिरा
विजय मुहूर्त13:13 – 13:59सूर्य आधारित समय
गोधूलि मुहूर्त16:49 – 17:13सूर्य आधारित समय
त्रिपुष्कर योगइस पंचांग-दिन में नहीं
द्विपुष्कर योगइस पंचांग-दिन में नहीं
सर्वार्थ सिद्धि योगइस पंचांग-दिन में नहीं
अमृत सिद्धि योगइस पंचांग-दिन में नहीं
रवि योगइस पंचांग-दिन में नहीं
वर्ज्यम16:18 – 17:45मृगशिरा
पंचकइस पंचांग-दिन में नहीं
आवश्यक शर्तें और कार्य-विशेष अपवाद

पुष्कर के लिए रविवार, मंगलवार या शनिवार; द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी; और निर्धारित नक्षत्र—तीनों का एक साथ होना आवश्यक है। त्रिपुष्कर: कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद। द्विपुष्कर: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा।

सर्वार्थ और अमृत सिद्धि में पूर्ण वार–नक्षत्र सारणियाँ लागू हैं। मंगलवार–अश्विनी, गुरुवार–पुष्य और शनिवार–रोहिणी में विवाह, यात्रा और नए गृह-प्रवेश के स्रोतगत निषेध बने रहते हैं। ये योग व्यक्तिगत कार्य-विशेष मुहूर्त का अंतिम निर्णय नहीं हैं।

अमृत काल और वर्ज्यम की अलग-अलग सारणी और अवधि वास्तविक नक्षत्र-काल के अनुपात से हैं; मूल में वर्ज्यम के दो खंड हैं। विजय दिनमान का 15 में 11वाँ भाग है। यहाँ गोधूलि सूर्यास्त के 12 मिनट पहले से 12 मिनट बाद वाली नामित परंपरा है; अन्य परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं।

पंचक चंद्र भोगांश [300°, 360°) है: धनिष्ठा चरण 3–4 से रेवती के अंत तक। प्रकार वास्तविक आरंभ के वार से है; वार स्थानीय सूर्योदय पर बदलता है: रविवार रोग, सोमवार राज, मंगलवार अग्नि, शुक्रवार चोर, शनिवार मृत्यु; इस परंपरा में बुधवार/गुरुवार का नामित प्रकार नहीं है।

रवि योग: सूर्य नक्षत्र से चंद्र नक्षत्र की समावेशी गणना 4, 6, 9, 10, 13 या 20 (Indastro परंपरा)। दोनों ग्रहों के नक्षत्र-परिवर्तन जाँचे जाते हैं। स्रोत में रविवार का कार्य-संबंधी निषेध बना रहता है; इससे अन्य निषेध मिटने का आश्वासन नहीं है।

दिशाशूल एवं पारंपरिक परिहार

दक्षिण · 05:39 – 30/10/2026, 05:39 · यात्रा से पूर्व पारंपरिक आहार-परिहार: दही.

UOU MAJY-103 में यह पारंपरिक विधि वर्णित है। यह यात्रा-सुरक्षा की गारंटी नहीं है; अपने आहार संबंधी प्रतिबंधों का पालन करें।

गंडमूल · दैनिक नक्षत्र / चरण

इस पंचांग-दिन में नहीं।

विवरण देखें

छह नक्षत्र हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। प्रत्येक में 1–4 चरण हैं, प्रत्येक चरण 3°20′ का है। तालिका केवल आज के चंद्र गोचर को दिखाती है।

यह किसी व्यक्ति या नवजात के दोष का निर्णय नहीं है। जन्मकुंडली का गंडमूल विचार सही जन्म-समय, स्थान, कुंडली और निर्धारित परंपरा से होता है; दैनिक स्थिति मात्र से व्यक्तिगत दोष सिद्ध नहीं होता।

चौघड़िया और होरा · पारंपरिक सारणी

चौघड़िया उत्तर भारतीय क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार है। होरा में पारंपरिक ग्रह-घंटे दिए हैं। केवल इन सारणियों से पूर्ण या व्यक्तिगत मुहूर्त तय नहीं होता; अतिरिक्त क्षेत्रीय वर्जन यहाँ नहीं जाँचे गए हैं।

चौघड़िया · क्षेत्रीय परंपरा

दिन
समयनाम
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रात
समयनाम
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत

होरा · पारंपरिक ग्रह-घंटे

दिन
समयग्रह
गुरु
मंगल
सूर्य
शुक्र
बुध
चन्द्र
शनि
गुरु
मंगल
सूर्य
शुक्र
बुध
रात
समयग्रह
चन्द्र
शनि
गुरु
मंगल
सूर्य
शुक्र
बुध
चन्द्र
शनि
गुरु
मंगल
सूर्य

दैनिक लग्न तालिका

वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर राशियाँ हैं। केवल स्थिर लग्न होने से किसी कार्य का मुहूर्त निर्धारित नहीं होता।

सूर्योदय → अगला सूर्योदय; प्रथम/अंतिम खंड इस दिन की सीमा तक हैं, इसलिए पहली राशि अंत में फिर आ सकती है।

लग्नआरंभसमाप्ति
तुला05:3907:06
वृश्चिकस्थिर07:0609:22
धनु09:2211:27
मकर11:2713:14
कुम्भस्थिर13:1414:48
मीन14:4816:19
मेष16:1917:59
वृषभस्थिर17:5919:58
मिथुन19:5822:11
कर्क22:1130/10/2026, 00:27
सिंहस्थिर30/10/2026, 00:2730/10/2026, 02:38
कन्या30/10/2026, 02:3830/10/2026, 04:48
तुला30/10/2026, 04:4830/10/2026, 05:39

आगामी व्रत एवं पर्व

पूरा कैलेंडर देखें →

स्रोत एवं गणना-पद्धति

Lahiri / JPL DE440 · स्थानीय सूर्योदय पर निरयन स्थिति; web, PDF और शेयर में एक ही गणना-परिणाम है।

गणना संबंधी जानकारी

समय चुने शहर के IANA ऐतिहासिक समय-क्षेत्र के अनुसार और तारीखें ग्रेगोरियन कैलेंडर में हैं। पंचांग दिवस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक है। नीचे सूर्योदय की स्थिति और उसके बाद होने वाले प्रत्येक परिवर्तन का समाप्ति समय दिया गया है।

शहर के संदर्भ बिंदु: अव्यानि के मौजूदा स्थान और GeoNames डेटा (CC BY 4.0)। GPS का उपयोग नहीं होता। GeoNames

स्थापित एपिमेरिस के लिए समर्थित तारीखें: 01/04/1550 – 31/08/2649

अनुमानित/अनंतिम समय में पृथ्वी-घूर्णन का पूर्वानुमान या मापित डेटा के बाहर डेल्टा-टी मॉडल प्रयुक्त है। सुदूर शताब्दियों की अनिश्चितता व्रत-तारीखों को भी प्रभावित कर सकती है। ऐतिहासिक समय-क्षेत्र पुनर्निर्मित हैं; भविष्य के नियम बदल सकते हैं।

यमगंड और दिन का गुलिक काल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के आठ बराबर भागों पर आधारित हैं। वार के अनुसार इनके भाग सामान्य पंचांग परंपरा से लिए गए हैं। ये दैनिक समय हैं, व्यक्तिगत मुहूर्त का निर्णय नहीं।

दैनिक चंद्रोदय/चंद्रास्त और व्रत का चंद्रोदय मौजूदा अनुष्ठानिक चंद्रकेंद्र पद्धति से, बिना अपवर्तन के हैं। संदर्भ समय और क्षितिज की पद्धति चंद्र–सूर्य अनुभाग में देखें।

ब्रह्म मुहूर्त पिछली रात के सूर्यास्त से आज के सूर्योदय तक के पंद्रह बराबर भागों में चौदहवाँ है। प्रदोष में अव्यानि का रात्रि का पहला पाँचवाँ भाग और निशीथ में मध्य का पंद्रहवाँ भाग लिया गया है। ये चुनी हुई पद्धतियाँ हैं; सभी परंपराओं की परिभाषा समान होने का दावा नहीं है।

दुर्मुहूर्त में वार के अनुसार दिन के पंद्रहवें भाग लिए गए हैं; मंगलवार को रात का सातवाँ भाग भी है। भद्रा में विष्टि करण का पूरा समय है; वास, मुख और पुच्छ का विभाजन नहीं। चौघड़िया में दिन और रात के आठ-आठ, होरा में बारह-बारह भाग हैं। यह दैनिक होरा पद्धति कुंडली की मौजूदा होरा गणना नहीं बदलती। चौघड़िया का अमृत एक पारंपरिक नाम है, नक्षत्र-आधारित अमृत काल नहीं।

पारंपरिक स्रोत और तुलना के संदर्भ:ब्रह्म मुहूर्त: मनु ४.९२ और भाष्य · विवाह मुहूर्त में विष्टि: बृहत्संहिता १०० · चौघड़िया सारणी · होरा संदर्भ