इस तारीख के समय अनुमानित हैं। नीचे गणना संबंधी जानकारी देखें।
सभी समय आपके चुने शहर के अनुसार हैं। तिथि समाप्ति का समय पारण समय नहीं है।
व्रत दिवस का सूर्योदय: 05:04. नीचे दिए समय या आचरण विधि के अनुसार पूजा करें।
परंपरानुसार पूजा, व्रत एवं पारण
स्मार्त गृहस्थ
पर्व की तिथि
24/07/2026, 09:13 – 11:34
विशेष निश्चित पूजा समय
इस परंपरा में सार्वभौम समय निर्धारित नहीं; कुलाचार और संकल्प के अनुसार करें
व्रत · पारण आरंभ तक
05:04 – 26/07/2026, 05:06; पारण काल में पूजा के बाद समापन
पारण
26/07/2026, 05:06 – 26/07/2026, 07:44
हरिवासर · द्वादशी का प्रथम चतुर्थांश
11:34 – 18:10; चयनित परंपरा का पारण लागू
व्रत नियम
संकल्पानुसार अन्न-दाल का त्याग; दर्शाया पारण नियम लागू
वैष्णव (गौड़ीय)
पर्व की तिथि
24/07/2026, 09:13 – 11:34
विशेष निश्चित पूजा समय
इस परंपरा में सार्वभौम समय निर्धारित नहीं; कुलाचार और संकल्प के अनुसार करें
व्रत · पारण आरंभ तक
05:04 – 26/07/2026, 05:06; पारण काल में पूजा के बाद समापन
पारण
26/07/2026, 05:06 – 26/07/2026, 09:30
हरिवासर · द्वादशी का प्रथम चतुर्थांश
11:34 – 18:10; चयनित परंपरा का पारण लागू
व्रत नियम
संकल्पानुसार अन्न-दाल का त्याग; दर्शाया पारण नियम लागू
महत्त्व
भगवान विष्णु की भक्ति, संयम और स्मरण का दिन।
व्रत / पूजा विधि
स्नान के बाद संकल्प लें। पुष्प और तुलसी से विष्णु पूजा, नैवेद्य और प्रार्थना करें; विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार अर्पण और पारण से व्रत पूर्ण करें।
महत्त्वपूर्ण नियम
व्रत की तारीख तिथि के आरंभ की तारीख से अलग हो सकती है। स्मार्त गृहस्थ नियम सूर्योदय तथा गौड़ीय वैष्णव नियम अरुणोदय और महाद्वादशी भी देखते हैं। संकल्पानुसार अन्न-दाल का त्याग करें। हरिवासर में पारण न करें; अपनी परंपरा का पारण समय देखें।
समय चुने शहर के IANA ऐतिहासिक समय-क्षेत्र के अनुसार और तारीखें ग्रेगोरियन कैलेंडर में हैं। पंचांग दिवस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक है। नीचे सूर्योदय की स्थिति और उसके बाद होने वाले प्रत्येक परिवर्तन का समाप्ति समय दिया गया है।
शहर के संदर्भ बिंदु: अव्यानि के मौजूदा स्थान और GeoNames डेटा (CC BY 4.0)। GPS का उपयोग नहीं होता। GeoNames
स्थापित एपिमेरिस के लिए समर्थित तारीखें: 01/04/1550 – 31/08/2649
अनुमानित/अनंतिम समय में पृथ्वी-घूर्णन का पूर्वानुमान या मापित डेटा के बाहर डेल्टा-टी मॉडल प्रयुक्त है। सुदूर शताब्दियों की अनिश्चितता व्रत-तारीखों को भी प्रभावित कर सकती है। ऐतिहासिक समय-क्षेत्र पुनर्निर्मित हैं; भविष्य के नियम बदल सकते हैं।
यमगंड और दिन का गुलिक काल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के आठ बराबर भागों पर आधारित हैं। वार के अनुसार इनके भाग सामान्य पंचांग परंपरा से लिए गए हैं। ये दैनिक समय हैं, व्यक्तिगत मुहूर्त का निर्णय नहीं।
दैनिक चंद्रोदय/चंद्रास्त और व्रत का चंद्रोदय मौजूदा अनुष्ठानिक चंद्रकेंद्र पद्धति से, बिना अपवर्तन के हैं। संदर्भ समय और क्षितिज की पद्धति चंद्र–सूर्य अनुभाग में देखें।
ब्रह्म मुहूर्त पिछली रात के सूर्यास्त से आज के सूर्योदय तक के पंद्रह बराबर भागों में चौदहवाँ है। प्रदोष में अव्यानि का रात्रि का पहला पाँचवाँ भाग और निशीथ में मध्य का पंद्रहवाँ भाग लिया गया है। ये चुनी हुई पद्धतियाँ हैं; सभी परंपराओं की परिभाषा समान होने का दावा नहीं है।
दुर्मुहूर्त में वार के अनुसार दिन के पंद्रहवें भाग लिए गए हैं; मंगलवार को रात का सातवाँ भाग भी है। भद्रा में विष्टि करण का पूरा समय है; वास, मुख और पुच्छ का विभाजन नहीं। चौघड़िया में दिन और रात के आठ-आठ, होरा में बारह-बारह भाग हैं। यह दैनिक होरा पद्धति कुंडली की मौजूदा होरा गणना नहीं बदलती। चौघड़िया का अमृत एक पारंपरिक नाम है, नक्षत्र-आधारित अमृत काल नहीं।