व्रत एवं पर्व कैलेंडर

कोलकाता · जून 2026

चुने शहर के आवर्ती तिथि-आधारित व्रत एवं पर्व। यह सभी क्षेत्रीय पर्वों की संपूर्ण सूची नहीं है।

  1. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  2. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  3. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  4. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  5. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  6. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  7. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  8. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  9. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  10. एकादशी →

    एकादशी · कृष्ण

    स्मार्त एवं गौड़ीय वैष्णव

    पारण · स्मार्त
    12/06/2026 · – 07:33

    पारण · गौड़ीय
    12/06/2026 · – 09:21

  11. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  12. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  13. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  14. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  15. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  16. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  17. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  18. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  19. एकादशी →

    एकादशी · शुक्ल

    स्मार्त

    पारण
    26/06/2026 · – 07:36

  20. एकादशी →

    एकादशी · शुक्ल

    गौड़ीय वैष्णव

    पारण
    27/06/2026 · – 09:24

  21. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं
  22. सूचीबद्ध व्रत या पर्व नहीं

इस सूची में पर्व वाले दिन और आज की तारीख हैं। किसी भी दिन का पंचांग देखने के लिए तारीख चुनें।

WhatsApp पर साझा करें

गणना संबंधी जानकारी

समय चुने शहर के IANA ऐतिहासिक समय-क्षेत्र के अनुसार और तारीखें ग्रेगोरियन कैलेंडर में हैं। पंचांग दिवस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक है। नीचे सूर्योदय की स्थिति और उसके बाद होने वाले प्रत्येक परिवर्तन का समाप्ति समय दिया गया है।

शहर के संदर्भ बिंदु: अव्यानि के मौजूदा स्थान और GeoNames डेटा (CC BY 4.0)। GPS का उपयोग नहीं होता। GeoNames

स्थापित एपिमेरिस के लिए समर्थित तारीखें: 01/04/1550 – 31/08/2649

यमगंड और दिन का गुलिक काल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के आठ बराबर भागों पर आधारित हैं। वार के अनुसार इनके भाग सामान्य पंचांग परंपरा से लिए गए हैं। ये दैनिक समय हैं, व्यक्तिगत मुहूर्त का निर्णय नहीं।

दैनिक चंद्रोदय/चंद्रास्त और व्रत का चंद्रोदय मौजूदा अनुष्ठानिक चंद्रकेंद्र पद्धति से, बिना अपवर्तन के हैं। संदर्भ समय और क्षितिज की पद्धति चंद्र–सूर्य अनुभाग में देखें।

ब्रह्म मुहूर्त पिछली रात के सूर्यास्त से आज के सूर्योदय तक के पंद्रह बराबर भागों में चौदहवाँ है। प्रदोष में अव्यानि का रात्रि का पहला पाँचवाँ भाग और निशीथ में मध्य का पंद्रहवाँ भाग लिया गया है। ये चुनी हुई पद्धतियाँ हैं; सभी परंपराओं की परिभाषा समान होने का दावा नहीं है।

दुर्मुहूर्त में वार के अनुसार दिन के पंद्रहवें भाग लिए गए हैं; मंगलवार को रात का सातवाँ भाग भी है। भद्रा में विष्टि करण का पूरा समय है; वास, मुख और पुच्छ का विभाजन नहीं। चौघड़िया में दिन और रात के आठ-आठ, होरा में बारह-बारह भाग हैं। यह दैनिक होरा पद्धति कुंडली की मौजूदा होरा गणना नहीं बदलती। चौघड़िया का अमृत एक पारंपरिक नाम है, नक्षत्र-आधारित अमृत काल नहीं।

पारंपरिक स्रोत और तुलना के संदर्भ:ब्रह्म मुहूर्त: मनु ४.९२ और भाष्य · विवाह मुहूर्त में विष्टि: बृहत्संहिता १०० · चौघड़िया सारणी · होरा संदर्भ